
一 | 국힘 "보완수사권 없었다면 징윤기 사건 묻힐 뻔"민주 "보완수사권 부실수사 예방 장치 아니야" [서울=뉴시스] 정병혁 기자 = 26일 서울 여의도 국회에서 성평등가족위원회 전체회의가 열리고 있다. 2026.08.26. [email protected][서울=뉴시스]한은진 기자 = 여야는 26일 국회 성평등가족위원회에서 검찰의 보완수사권 폐지를 두고 공방을 벌였다. 국민의힘은 검찰의 보완수사권 폐지를 골자로 하는 형사소송법 개정안 통과로 아동과 청소년, 여성 등 사회적 약자들이 입을 피해를 우려했다. 임종득 국민의힘 의원은 이날 국회에서 열린 전체회의에서 "부산 돌려차기 사건과 광주 장윤기 사건 모두 검찰의 보완수사를 통해 사실이 밝혀졌다"며 "경찰과 검찰 누가 우월하다를 떠나 교차 검증이 필요해서 보완수사권이 있던 것"이라고 말했다.임 의원은 "(검찰 보완수사권 폐지가) 통과되는데 성평등가족부 장관은 침묵했다"며 "성평등가족부가 이를 방관하는 것이 맞나. 성폭력 범죄가 계속 늘어나고 있는데 검찰 보완수사권이 없어지면 예상되는 여성들 피해가 클 것"이라고 우려했다. 강선영 국민의힘 의원은 "장윤기 사건과 부산 돌려차기 사건은 검찰에 보완수사권이 있으니 검찰이 다시 밝혀낸 것이지 실제 보완수사권이 없었다면 경찰에 의해 부실수사로 묻힐 뻔하고 장윤기 아빠에 의해 묻힐 뻔했다"고 말했다.강 의원은 "더불어민주당에서는 '검찰 보완수사권이 있는 가운데에도 장윤기 사건과 부산 돌려차기 사건이 있었다. 그게 뭐가 문제냐'고 하지만 보완수사권이 없어진 이후 가장 걱정하는 건 경찰의 부실 수사, 조직 내 이해관계가 있을 때 사건 축소, 경찰관의 비위가 수사 대상일 때 어떻게 할 것이냐다"라고 주장했다. 반면 민주당은 검찰 보완수사권이 있는 현재도 경찰의 부실수사가 있었다면서 검찰 보완수사권이 이를 예방할 수 있는 장치가 아니라고 강조했다.이주희 민주당 의원은 "(부산 돌려차기 사건과 장윤기 사건은) 검찰의 보완수사권이 있던 체제 하에서 발생한 사건"이라며 "기존 보완수사권이 경찰의 부실 수사를 예방하는 장치가 아니었단 점을 이 사건이 역설적으로 증명하고 있다"고 했다.이주희 의원은 "개정 형사소송법에 여러 피해자 보호를 위한 다층적 장치가 있지만 여전히 부족할 것"이라며 "여러 국민들이 우려하지 않을 수 있도록 제도적 보완장치를 마련해달라"고 주문했다.이수진 민주당 의원도 "형사소송법 개정안은 검찰의 수사 기소권의 독점을 해소하고 검찰 권력을 국민의 통제 아래에 두려는 역사적 전환점"이라며 "가보지 않은 길이라 여러 우려가 발생할 수 있다"고 했다.이수진 의원은 "피해자 권리 보호에 공백이 발생하지 않도록 중대범죄수사청의 안정적 출범 등 필요한 후속 조치를 해나가야 한다"며 "검사의 보완수사 요구를 전담하는 중대범죄수사청에 여성폭력 전담팀이 설치돼야 한다"고 주장했다.。 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार (27 अगस्त, 2025) को मध्य प्रदेश के महू में रण-संवाद 2025 कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि आने वाले समय में युद्ध कैसे लड़ा जाएगा। साथ ही रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत कभी पहले आक्रमण नहीं करता लेकिन अगर चुनौती मिलती है तो उसका पूरी ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा।,राजनाथ सिंह ने कहा, "कार्यक्रम का शीर्षक, 'रण संवाद', मुझे बहुत दिलचस्प लगा। यह नाम ही चिंतन और मनन का विषय है। एक ओर 'रण' युद्ध और संघर्ष की कल्पना जगाता है तो दूसरी ओर 'संवाद' संवाद, चर्चा और सुलह की ओर इशारा करता है। पहली नजर में, ये दोनों शब्द विरोधाभासी लगते हैं। जहां युद्ध है, वहां संवाद कैसे हो सकता है और जहां संवाद हो रहा है, वहां युद्ध कैसे हो सकता है? लेकिन गहराई से देखें तो यही नाम हमारे समय की सबसे प्रासंगिक सच्चाइयों में से एक को अपने में समेटे हुए है।",रण-संवाद 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "रण-संवाद का भारत में एक ऐतिहासिक आधार भी है और यह मुझे हमारे इतिहास की कई घटनाओं की याद दिलाता है जो हमें दिखाती हैं कि कैसे सभ्यतागत युद्धों का अर्थ 'रण' और संवादों का अर्थ 'संवाद' होता है और भारत में ये दोनों आपस में गुंथे हुए थे। हमारी संस्कृति में, संवाद युद्ध से अलग नहीं है। यह युद्ध से पहले होता है। यह युद्ध के दौरान होता है और युद्ध के बाद भी जारी रहता है। उदाहरण के लिए, महाभारत को ही लें, युद्ध को रोकने के लिए, भगवान कृष्ण शांति के दूत के रूप में गए। वे संवाद करने गए ताकि युद्ध को टाला जा सके।",उन्होंने कहा, "भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे; वे प्रौद्योगिकी, खुफिया, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का संयुक्त खेल होंगे। आने वाले समय में जो राष्ट्र प्रौद्योगिकी, रणनीति और अनुकूलनशीलता के त्रिकोण में निपुण होगा, वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा। सरल शब्दों में कहें तो यह इतिहास से सीखने और एक नया इतिहास लिखने का समय है; यह भविष्य का अनुमान लगाने और उसे आकार देने का समय है।",राजनाथ सिंह ने कहा, "आज, 21वीं सदी में, यह परिवर्तन और भी तेज हो गया है। सिर्फ सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आकार अब पर्याप्त नहीं है। साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित हवाई वाहन और उपग्रह-आधारित निगरानी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं। सटीक निर्देशित हथियार, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित जानकारी अब किसी भी संघर्ष में सफलता की आधारशिला बन गए हैं। आधुनिक युद्ध अब जमीन, समुद्र और हवा तक ही सीमित नहीं हैं; वे अब अंतरिक्ष और साइबरस्पेस तक फैल गए हैं। उपग्रह प्रणालियां, उपग्रह-रोधी हथियार और अंतरिक्ष कमान केंद्र शक्ति के नए साधन हैं। इसलिए, आज हमें केवल रक्षात्मक तैयारी की ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीति की भी आवश्यकता है।",रण-संवाद 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत कभी भी युद्ध चाहने वाला राष्ट्र नहीं रहा है। हमने कभी किसी के विरुद्ध आक्रमण नहीं किया है। वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकता बिल्कुल अलग है। हालांकि हमारी कोई आक्रामक मंशा नहीं है, फिर भी अगर कोई हमें चुनौती देता है तो यह जरूरी हो जाता है कि हम पूरी ताकत से उसका जवाब दें। ऐसा करने के लिए, हमें अपनी रक्षा तैयारियों को निरंतर बढ़ाना होगा। यही कारण है कि प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नति और साझेदारों के साथ निरंतर संवाद हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।",(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ) यह भी पढ़ें- 'हमारे पास तैरने वाला F-35...',INS उदयगिरी और हिमगिरी की कमीशनिंग पर राजनाथ सिंह की दहाड़。
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Published on:01:43:10
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